पश्चिम बंगाल में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले माहौल लगातार गरम हो रहा है। इसी बीच Election Commission of India (ECI) ने राज्य के DGP को औपचारिक पत्र भेजकर साफ कहा है कि Booth Level Officers (BLOs) और SIR यानी Self-Intensive Revision प्रक्रिया में लगे सभी चुनावी कर्मचारियों की सुरक्षा हर हाल में सुनिश्चित की जाए।
EC को बीते हफ्तों में कई शिकायतें मिली थीं कि कुछ जिलों में BLOs को धमकाने, उन पर दबाव बनाने और उनके काम में रुकावट डालने की कोशिशें हो रही हैं। आयोग का कहना है कि अगर फील्ड-लेवल कर्मचारियों को ही सुरक्षा का भरोसा नहीं मिलेगा, तो मतदाता सूची की पारदर्शी और सटीक तैयारी संभव नहीं है।
कुछ दिनों पहले कोलकाता में मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय के बाहर बड़े स्तर पर विरोध-प्रदर्शन हुआ था, जिसके दौरान सुरक्षा व्यवस्था टूटने की घटनाएँ भी सामने आई थीं। इसी घटना के बाद EC ने कोलकाता पुलिस से 48 घंटे में विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। आयोग ने CEO कार्यालय को “अधिक सुरक्षित परिसर” में स्थानांतरित करने का निर्देश भी जारी किया था।
स्थिति को गंभीर मानते हुए EC ने “Special Roll Observer” की नियुक्ति कर दी है, जो बंगाल में चल रही पूरी SIR प्रक्रिया की निगरानी करेगा। यह पहली बार है जब राज्य-स्तरीय मतदाता सूची सुधार कार्य पर इस तरह की सीधी, ऑन-ग्राउंड मॉनिटरिंग की जा रही है।
राज्य की राजनीतिक हलचल भी तेजी से बढ़ रही है। विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है कि BLOs पर दबाव बनाकर मतदाता सूची में हेरफेर की कोशिशें चल रही हैं। ruling पक्ष इन आरोपों से इनकार करता है, लेकिन EC का कड़ा रुख बताता है कि शिकायतें सतही नहीं थीं।
बंगाल में करीब 80,000 से ज्यादा BLOs इस समय SIR कार्य में लगे हुए हैं। इन पर किसी भी तरह का डर या दबाव चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकता है। EC ने स्पष्ट किया है कि SIR हर हाल में जारी रहेगा और किसी राजनीतिक या स्थानीय दबाव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अब नजर इस बात पर है कि राज्य प्रशासन और पुलिस अगले कुछ दिनों में सुरक्षा व्यवस्था को कितना मजबूत कर पाते हैं। अगर सुरक्षा उपाय उम्मीद के मुताबिक हुए, तो SIR सुचारू रूप से जारी रहेगा — वरना चुनावी तैयारियों को झटका लग सकता है।
